koshish
कोशिश जरूर करें.......!
मंज़िल तो निगाहों में है,
रास्ते पर भारी बरसात है.
वक़्त की भी पाबन्दी है,
पर हौसलों की क्या बात है.
आज के दिन का ये पैगाम है,
चलते रहना हर हाल में तू
भले ही राहों में चाहे
कितने ही आंधी या तूफ़ान है.
निकल पड़ा है मुसाफिर।,
अपने संघर्षों के राहों पर।
इतनी सच्ची की है कोशिश,
की मिल ही जाएगी उम्मीद अगले मोड़ पर.
धीरे धीरे परिश्रम की धुप खिलेगी,
जिसकी छाया तले उसकी हर कोशिश निखर जाएगी,
कामयाबी अब भी थोड़ी दूर नज़र आएगी
थक जाने की उसे चिंता सताएगी
जो फिर चलने की थान ले वो,
अपने कोशिश को अपना खुदा मान ले वो.
तो जल्द ही उसकी चाहत रंग लाएगी
दूर शिखर पर नहीं,
इन्ही राहों में उसे अपनी मंज़िल नज़र आएगी।
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