मंज़िल की खोज जन्म के साथ हर राही एक सफर पर निकलता है वो सफर जिसका अंत वो किसी मंज़िल पे मानता है। वो सफर जो उगते सुरज के साथ शुरू होकर रात के आगोश में ख़त्म होता है। माँ की गोद या नेपुल के दूध में मंज़िल मिल...
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Showing posts from 2015
ADMIRING KERALA
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Got an wonderful opportunity to visit Kerala just for one day but the memories of its beauty will reside deep in my heart Kerala Pc-Google ऐसी खूबसूरती और कहाँ कितना सुंदर है ये जहाँ तेरा, जहाँ देखूं है दृष्य मनमोहरा। हैं कहीं लंबे पेड़ों की कतारें, लटकें हैं नारियल इनपे कई सारे। ये नन्ही नदियों की काया तो देखो, फ़ना होजाए हर दिल देख इसके सुंदरता को। इसी के किनारे लेटे हैं खेत , खलिहान, लेहरा रहे हैं जिनपे प्यारे प्यारे धान। जानवरों की कोशिश चारे को पाने की, लुभा रही है दिल हर मुसाफिर की। इन्ही दिलखुश नज़रों के बीच, बनें हैं कितने आशियाने। मनो कुदरत के गोद में हो मेहफ़ूज़, इंसानों की ये मकानें। प्रकृति की खूबसूरती इस जहाँ की दिलरुबा है , हर राही का दिल इसने लुभाया है। soon will be posting the beauty of the evening(sunset) of Kerala
HAPPY FRIENDSHIP DAY
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दोस्तों बिन क्या जीना। .... रब्बा मेरे ये कैसी किस्मत बनाई घर से दूर होके भी, उसकी याद न आई अनजाने सफर में मिला , कुछ यारों साथ पा के जिन्हे गूंज उठा मेरे जिंदगी का सार इन राहों में जब भी तनहा हुए हमेशा साथ दोस्तों का पाए रोशन रहेगी सदा हमारी यारी फिकी होगी इसके आगे बाकि सब दुनियादारी तक़दीर के राहों पे रहे पहले तुम्हारी बाजि मिलती रहे हर पल खुशियाँ न्यारी न्यारी
koshish
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कोशिश जरूर करें.......! मंज़िल तो निगाहों में है, रास्ते पर भारी बरसात है. वक़्त की भी पाबन्दी है, पर हौसलों की क्या बात है. आज के दिन का ये पैगाम है, चलते रहना हर हाल में तू भले ही राहों में चाहे कितने ही आंधी या तूफ़ान है. निकल पड़ा है मुसाफिर।, अपने संघर्षों के राहों पर। इतनी सच्ची की है कोशिश, की मिल ही जाएगी उम्मीद अगले मोड़ पर. धीरे धीरे परिश्रम की धुप खिलेगी, जिसकी छाया तले उसकी हर कोशिश निखर जाएगी, कामयाबी अब भी थोड़ी दूर नज़र आएगी थक जाने की उसे चिंता सताएगी जो फिर चलने की थान ले वो, अपने कोशिश को अपना खुदा मान ले वो. तो जल्द ही उसकी चाहत रंग लाएगी दूर शिखर पर नहीं, इन्ही राहों में उसे अपनी मंज़िल नज़र आएगी।
Musafir hum hain( journey yet to begin after B.tech)
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Musafir hum hain Musafir hum hain yaro koi hamara thikana nahin Abhi toh chalna seekha hai rukna humein gawara nahin Yeh rahein kuch bhi sikhayein sikhenge jee laga ke Apne janani ke ashirwad liye kal daudenge man laga ke Path mein agar khayenge thokar toh jhel lenge muskurakar Ek doosre ka saath phir bhi na chodenge chahe dekh le ye kudrat aazmakar Raaste mein jo milenge din-dukhi unko gale se lagate chalenge Safalta ke choti par apna Apna parcham joroor lehrayenge Musafir hum hain yaro koi hamara thikana nahin Abhi toh chalna seekha hai rukna humein gawara nahin